सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

शराब छोड़ने के उपाय

कहतें हैं कि शराब पीने की जिसे आदत
पड़ जाती है, आसानी से
नहीं छुटती, लेकिन
होम्योपेथी में सेलेनियम-30 एक
ऐसी दवा है, जिसके कुछ दिनों का सेवन करने के बाद
शराब पीने वाले को शराब खराब लगने
लगती है! एक दिन में तीन बार सेवन कि गई
पहले दिन कि खुराकें ही आश्चर्यजनक लाभ
पहुंचाती है और शराब पीने
कि इच्छा समाप्त हो जाती है! पूरा लाभ पाने के लिए कुछ
दिनों तक नियमित सेवन कराएं!
2)सेब का रस बार बार पीने से और भोजन के साथ सेब
खाने से भी शराब कि आदत छुट जाती है!
यदि उबले हुए सेबों को दिन में तीन बार खिलाया जाए,
तो कुछ ही दिनों में शराब पीने कि लत छुट
जाती है!
3)500 ग्राम नई देसी अजवाइन को पीसकर
उसे 7 लीटर पानी में दो दिन के लिए भिगो दें!
फिर धीमी आंच पर इतना पकाएं
कि पानी लगभग 2 लीटर रह जाए!
ठंडा होने पर छान कर बोतल में भर दें! शराब कि तलब लगने पर 5
चम्मच कि मात्रा में पीते रहने से भी शराब
पीने कि आदत छुट जाती है!
4)शराब छुड़ाने में एक दवा ऐकेम्प्रोसेट ईजाद हुई है! इसे अब तक
दस लाख से ज्यादा लोगों ने इस्तिमाल किया है और बेहतर परिणाम मिले
हैं! इस दवा को फ्रांस में लें स्थित 'लिफा एस.ए
कम्पनी ने बनाया है! फिलहाल ये दवा एशिया, यूरोप,
दक्षिणी अमेरिका आदि के देशों में आसानी से
उपलब्ध है!

टिप्पणियाँ

  1. Thanks for sharing your post. You can get over alcohol issues by using herbal treatment. It is fortified with natural ingredients. visit http://www.drug-treatment.in/

    जवाब देंहटाएं
  2. Alcohol addiction is curable and there is effective natural treatment which is available for the betterment of addicted health. This blog really shares informative and helpful posts with us.

    जवाब देंहटाएं
  3. Alcohol abuse means having unhealthy or dangerous drinking habits, such as drinking every day or drinking too much at a time. Natural alcohol addiction treatment is an effective remedy for the people who wants to quit damaging drug additions. Cigarettes, alcohols and related products harmfully affect human body.

    जवाब देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

**स्वस्थ्य वृद्धावस्था**

बुढ़ापे की अवस्था हर मनुष्य के जीवन का ऐसा अंग है जब अंग-प्रत्यंग ढीले पड़ जाते हैं. चेहरे से रौनक और शरीर से स्फूर्ति भी चली जाती है. ज्यादातर मनुष्यों में इस अवस्था में अनेक प्रकार के रोग उत्पन्न हो जाते हैं. ऐसे में उनका मन भी उत्साह हीन हो जाता है. परंतु क्या वास्तव में जीवन का अन्तिम छोर इस प्रकार का होना चाहिए? क्या हम बुढ़ापे की रूपरेखा को बदल नही सकते? शरीर में धीरे-धीरे कमजोरी आने लगती है और चयापचय के कार्य मंद पड़ जाते हैं. चेहरे पर झुर्रियन और रंगत में असंतुलन से धब्बे और झाइयाँ पड़ जातीं हैं. माथे, गालों और गले पर झाइयाँ आना एक आम बात है. बुढ़ापे को लाने में दो कारक विशेष रुप से कार्यरत होते हैं जिनमें से एक बाह्य है और अन्य आंतरिक है. यदि सूर्य के प्रकाश कि तीव्रता वास के क्षेत्र में अधिक है और सूर्य कि किरणों नित्य ही शरीर को दीर्घ समय तक स्पर्श करती हैं तो यह बुढ़ापे को अति तीव्र कर देती है. रेगिस्तान में सूखे क्षेत्र में रहना, गर्म हवाएँ, चिंता, तनाव, धूम्रपान, अनुचित और आवश्यकता से कम भोजन सेवन करना, खारा पानी, व्यायाम ना करना या फिर अधिक ठ...

प्याज का ये उपयोग जानकर हैरान रह जायेंगे आप

प्याज़ का एक और बहुत बढ़ा फायदा भी है जिसके बारे में शायद ही कुछ लोग जानते हों रात को सोते समय अपने मोज़े में प्याज का एक टुकड़ा रखने के फायदे सुनकर हैरान रह जायेंगे आप यह बात मेडिकल भी कही गई है के प्‍याज में मौजूद जो फॉस्फोरिक एसिड होता है वो खून की धमनियों में घुस कर आपके खून को शुद्ध बनाता है यह भी एक तरह का  Blood Purifier  है. यहाँ आपकी जानकारी के लिये हम बता दें कि, के हमारे पांव काफी शक्‍तीशाली होते हैं हैं और इनकी हमारे शरीर में आंतरिक अंगों तक तक बिलकुल सीधे पहुंच होती है। प्याज के टुकड़े को मोज़े में रखकर सोने के क्या फायदे हैं दोस्तों रात को सोने से पहले अपने मोजे में प्‍याज का एक छोटा सा टुकड़ा रखने से हमें बहुत बढे फायदे मिल सकते हैं। इस बात को तो ज़्यादातर लोग जानते ही हैं कि प्‍याज और लहसुन वायु को शुद्ध करते हैं पर इस बात को बहुत कम लोग ही जानते हैं कि जब इन्‍हें शरीर पर लगाया जाता है तो यह शरीर कि अंदर के कीटाणुओं और जीवाणुओं का भी नाश कर सकते हैं। इसीलिए मोजे में प्याज रख कर सोने से हम अपने बदन के अंगों को भी स्वस्थ रख सकते हैं. ये भी पढ़ें:- रूह अफजा ...

आयुर्वेद द्वारा कर्क (Cancer) रोग से बचाव व उपचार

कॅन्सर अथवा कर्करोग एक जानलेवा और कष्टकारी रोग है. इसके लक्षणों का पता देर से चलता है तथा निदान में भी देर लग जाती है. इस रोग में शरीर के किसी अंग की कोशिकायों (cells) में अत्यधिक वृद्धि हो जाती है. इसे अन्य अंगों पर प्रादुर्भाव (negative effect) पड़ता है. जब कॅन्सर के ट्यूमर में  बढ़ोतरी हो जाती है तो वह शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाता है और यह अत्यंत पीढ़ा दायक रूप ले लेता है. इस रोग में तीनों दोष प्रभावित होते हैं. आयुर्वेद में कॅन्सर का निदान (Remedial Measures In Treatment Of Cancer In Hindi) इस रोग में तीनों दोषों में विकृति पाई जाती है तथा इनका निवारण चरक और सुश्रुत संहिता में वर्णित किया गया है. इन तीनों दोषों  की शांति हो जाने पर यह रोग स्वयं ही ठीक हो जाता है. कर्क रोग में लाभ देनेवाली कुछ औषधियाँ (Herbs Useful In Treatment Of Disease in Hindi) आयुर्वेद शास्त्रों के अनुसार सात मुख्य औषधियों का प्रयोग इस रोग के विमोचन में किया जाता है. यह औषधियाँ इस प्रकार हैं. अश्वगंधा :  यह औषधि का उपयोग शरीर को पुष्टि देने के लिए एवं शरीर...