सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

हंसने के तरीके

खिलखिलाकर हंसना
समुद्रशास्त्र में बताया गया है कि जो लोग हंसने में कंजूसी नहीं करते हैं यानी खिलखिलाकर हंसते हैं ऐसे लोग उत्साही प्रवृति के होते हैं। ऐसे व्यक्तियों की बौद्धिक क्षमता अच्छी होती है तथा सहनशील होते हैं।
इनके मन में छल कपट की भावना नहीं रहती है। जरूरत पड़ने पर लोगों की मदद के लिए सदैव तैयार रहते हैं। इनके जीवन में प्रेम का अहम स्थान होता है।
अट्टहास लगाना
कुछ लोग हंसते समय तेज आवाज निकालते हैं। इस तरह की हंसी को अट्टाहास वाली हंसी कहते हैं। जिन लोगों की ऐसी हंसी होती है वह स्वाभिमानी और परिश्रमी होते हैं। ऐसे लोग जीवन में सफल भी होते हैं। लेकिन हंसी के साथ चेहरे के हाव-भाव भी बदल रहे हों तो व्यक्ति अभिमानी हो सकता है।
मंद मुस्कान
कई लोग बड़े ही मंद मुस्कान के साथ हंसते हैं। जिन लोगों की ऐसी हंसी होती है वह वह बुद्धिमान और गंभीर प्रवृति के होते हैं। ऐसे लोगों को जल्दी क्रोध नहीं आता है और कठिन समय में धैर्य से काम लेते हैं।
रुक-रुक कर हंसना
कुछ लोग हंसने में भी कंजूसी करते हैं यानी रूक-रूक कर हंसते हैं या किसी बात पर देर से इन्हें हंसी आती है। ऐसे लोगों की बौद्धिक क्षमता सामान्य होती है। ऐसे लोग विवेक की बजाय भावना से काम लेते हैं। बचत की प्रवृति इनमें खूब होती है।
'ही-ही' करना
समुद्रशास्त्र में बताया गया है कि ऐसे लोग जो 'ही-ही' करके बनावटी हंसी हंसते हैं वह मौकापरस्त और धूर्त होते हैं। ऐसे लोगों की बौद्धिक क्षमता सामान्य स्तर की होती है। इन पर आंख बंद कर के विश्वास नहीं करना चाहिए।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

**स्वस्थ्य वृद्धावस्था**

बुढ़ापे की अवस्था हर मनुष्य के जीवन का ऐसा अंग है जब अंग-प्रत्यंग ढीले पड़ जाते हैं. चेहरे से रौनक और शरीर से स्फूर्ति भी चली जाती है. ज्यादातर मनुष्यों में इस अवस्था में अनेक प्रकार के रोग उत्पन्न हो जाते हैं. ऐसे में उनका मन भी उत्साह हीन हो जाता है. परंतु क्या वास्तव में जीवन का अन्तिम छोर इस प्रकार का होना चाहिए? क्या हम बुढ़ापे की रूपरेखा को बदल नही सकते? शरीर में धीरे-धीरे कमजोरी आने लगती है और चयापचय के कार्य मंद पड़ जाते हैं. चेहरे पर झुर्रियन और रंगत में असंतुलन से धब्बे और झाइयाँ पड़ जातीं हैं. माथे, गालों और गले पर झाइयाँ आना एक आम बात है. बुढ़ापे को लाने में दो कारक विशेष रुप से कार्यरत होते हैं जिनमें से एक बाह्य है और अन्य आंतरिक है. यदि सूर्य के प्रकाश कि तीव्रता वास के क्षेत्र में अधिक है और सूर्य कि किरणों नित्य ही शरीर को दीर्घ समय तक स्पर्श करती हैं तो यह बुढ़ापे को अति तीव्र कर देती है. रेगिस्तान में सूखे क्षेत्र में रहना, गर्म हवाएँ, चिंता, तनाव, धूम्रपान, अनुचित और आवश्यकता से कम भोजन सेवन करना, खारा पानी, व्यायाम ना करना या फिर अधिक ठ...

प्याज का ये उपयोग जानकर हैरान रह जायेंगे आप

प्याज़ का एक और बहुत बढ़ा फायदा भी है जिसके बारे में शायद ही कुछ लोग जानते हों रात को सोते समय अपने मोज़े में प्याज का एक टुकड़ा रखने के फायदे सुनकर हैरान रह जायेंगे आप यह बात मेडिकल भी कही गई है के प्‍याज में मौजूद जो फॉस्फोरिक एसिड होता है वो खून की धमनियों में घुस कर आपके खून को शुद्ध बनाता है यह भी एक तरह का  Blood Purifier  है. यहाँ आपकी जानकारी के लिये हम बता दें कि, के हमारे पांव काफी शक्‍तीशाली होते हैं हैं और इनकी हमारे शरीर में आंतरिक अंगों तक तक बिलकुल सीधे पहुंच होती है। प्याज के टुकड़े को मोज़े में रखकर सोने के क्या फायदे हैं दोस्तों रात को सोने से पहले अपने मोजे में प्‍याज का एक छोटा सा टुकड़ा रखने से हमें बहुत बढे फायदे मिल सकते हैं। इस बात को तो ज़्यादातर लोग जानते ही हैं कि प्‍याज और लहसुन वायु को शुद्ध करते हैं पर इस बात को बहुत कम लोग ही जानते हैं कि जब इन्‍हें शरीर पर लगाया जाता है तो यह शरीर कि अंदर के कीटाणुओं और जीवाणुओं का भी नाश कर सकते हैं। इसीलिए मोजे में प्याज रख कर सोने से हम अपने बदन के अंगों को भी स्वस्थ रख सकते हैं. ये भी पढ़ें:- रूह अफजा ...

आयुर्वेद द्वारा कर्क (Cancer) रोग से बचाव व उपचार

कॅन्सर अथवा कर्करोग एक जानलेवा और कष्टकारी रोग है. इसके लक्षणों का पता देर से चलता है तथा निदान में भी देर लग जाती है. इस रोग में शरीर के किसी अंग की कोशिकायों (cells) में अत्यधिक वृद्धि हो जाती है. इसे अन्य अंगों पर प्रादुर्भाव (negative effect) पड़ता है. जब कॅन्सर के ट्यूमर में  बढ़ोतरी हो जाती है तो वह शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाता है और यह अत्यंत पीढ़ा दायक रूप ले लेता है. इस रोग में तीनों दोष प्रभावित होते हैं. आयुर्वेद में कॅन्सर का निदान (Remedial Measures In Treatment Of Cancer In Hindi) इस रोग में तीनों दोषों में विकृति पाई जाती है तथा इनका निवारण चरक और सुश्रुत संहिता में वर्णित किया गया है. इन तीनों दोषों  की शांति हो जाने पर यह रोग स्वयं ही ठीक हो जाता है. कर्क रोग में लाभ देनेवाली कुछ औषधियाँ (Herbs Useful In Treatment Of Disease in Hindi) आयुर्वेद शास्त्रों के अनुसार सात मुख्य औषधियों का प्रयोग इस रोग के विमोचन में किया जाता है. यह औषधियाँ इस प्रकार हैं. अश्वगंधा :  यह औषधि का उपयोग शरीर को पुष्टि देने के लिए एवं शरीर...