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महिलाओं के लिए » यूरीन इन्फेक्शन और उसका सरल उपाय

पेशाब में दिक्कत आना या  यूरीन इन्फेक्शन  होना एक आम समस्या होती जा रही है ज़्यादातर पुरुष , महिलाओं या जवान लड़कियों में 100 में से अस्सी प्रतिशत लोग कभी न कभी मूत्र रोगों से परेशान रहे होते हैं. क्रैनबेरी फल पेशाब के रस्ते में होने वाले संक्रमण का एक बेहतर प्राकृतिक उपाय है लेकिन ये इलाज सबसे प्रभावी होने के साथ साथ थोड़ा महंगा भी होता है क्योंकि क्रैनबेरी का फल आसानी से हर जगह उपलब्ध नहीं है और ये थोड़ा महंगा भी होता है. लेकिन यहाँ हम आज आपको जो उपाय बता रहे हैं वो बहुत किफायती, सस्ता और बड़ी ही आसानी से मिलने वाली चीज है और आप पेशाब सम्बन्धी समस्या से इस सस्ती चीज़ से राहत पा सकते हैं। यूरीन इन्फेक्शन और उसका उपाय  – URINE INFECTION TIPS IN HINDI मूत्र मार्ग संक्रमण यानी के  यूरीन इन्फेक्शन  दोस्तों इसके लक्षण आम और आसानी से पहचाने योग्य होते हैं।  यूरीन इन्फेक्शन में पेशाब के दौरान बार-बार आपको दर्द होता है और कई बार आपको पेशाब लगना, पेशाब के दौरान जलन होना, बुखार होना, मतली (जी मचलना) और आपके लोअर बैक में दर्द का होना ये लक्षण होते हैं। ये...

प्याज का ये उपयोग जानकर हैरान रह जायेंगे आप

प्याज़ का एक और बहुत बढ़ा फायदा भी है जिसके बारे में शायद ही कुछ लोग जानते हों रात को सोते समय अपने मोज़े में प्याज का एक टुकड़ा रखने के फायदे सुनकर हैरान रह जायेंगे आप यह बात मेडिकल भी कही गई है के प्‍याज में मौजूद जो फॉस्फोरिक एसिड होता है वो खून की धमनियों में घुस कर आपके खून को शुद्ध बनाता है यह भी एक तरह का  Blood Purifier  है. यहाँ आपकी जानकारी के लिये हम बता दें कि, के हमारे पांव काफी शक्‍तीशाली होते हैं हैं और इनकी हमारे शरीर में आंतरिक अंगों तक तक बिलकुल सीधे पहुंच होती है। प्याज के टुकड़े को मोज़े में रखकर सोने के क्या फायदे हैं दोस्तों रात को सोने से पहले अपने मोजे में प्‍याज का एक छोटा सा टुकड़ा रखने से हमें बहुत बढे फायदे मिल सकते हैं। इस बात को तो ज़्यादातर लोग जानते ही हैं कि प्‍याज और लहसुन वायु को शुद्ध करते हैं पर इस बात को बहुत कम लोग ही जानते हैं कि जब इन्‍हें शरीर पर लगाया जाता है तो यह शरीर कि अंदर के कीटाणुओं और जीवाणुओं का भी नाश कर सकते हैं। इसीलिए मोजे में प्याज रख कर सोने से हम अपने बदन के अंगों को भी स्वस्थ रख सकते हैं. ये भी पढ़ें:- रूह अफजा ...

गैस की समस्या का इलाज

गैस की समस्या का इलाज :-  दोस्तों कई बार ऐसा होता है कि ज्यादा भूखा रहने से या ज्यादा तला हुआ या भुना हुआ है अथवा तेज मिर्च मसाले वाला खाना खाने से आपको पेट में गैस की और पेट फूलने की प्रॉब्लम हो जाती है अगर आपको भी यह प्रॉब्लम है तो इस से तुरंत राहत पाने के लिए इस पोस्ट में कुछ उपाय दिए जा रहे हैं, जिनको आप पढ़ लें इससे आपको इन घरेलू नुस्खों से कुछ ही मिनटों में गैस की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा.  गैस की समस्या का इलाज घरेलू नुस्खों द्वारा – एसिडिटी का उपचार घरेलू नुस्खों द्वारा एसिडिटी की समस्या का समाधान और तुरंत गैस की प्रॉब्लम से राहत पाने के लिए आप हमारी इस पोस्ट के अंत तक पढ़े. सबसे पहले तो आप यह जान लें कि आखिर एसिडिटी के लक्षण क्या होते हैं और यह किन कारणों से हो सकती है आमतौर पर एसिडिटी होना आजकल एक आम समस्या है.जैसा की हमने आपको ऊपर बताया तेज मिर्च मसालों से बना खाना या फास्ट फूड खाने से आपको एसिडिटी की प्रॉब्लम हो सकती है और आपके पेट में गैस बनने लगती है और आपके सीने में जलन होना ये एसिडिटी के लक्षण होते हैं.  होठों का कालापन   कैसे दूर करें अगर ...

आयुर्वेद द्वारा लीवर सिरोसिस (Liver Cirrhosis) का उपचार

लिवर सरोसिस आयुर्वेद में वर्णित कुंभकाम्ल से मिलता-जुलता रोग है. इस रोग का मुख्य कारक है बहुत अधिक मदिरा पान. परंतु यह रोग हेपटाइटिस ए, बी, सी, डी नामक वाइरस के प्रकोप से भी होता है. बहुत से रोगों के लिए उपयुक्त दवाइयों के प्रयोग द्वारा या फिर पुरानी जिगर की बीमारी के कारण हो सकता है. Cryptogenic cirrhosis इस बीमारी का वह रूप है जिसमें अनिश्चित कारण से जिगर कार्य करना बंद कर देता है और सख़्त होकर गलने लगता है. लीवर सिरोसिस के लक्षण (Symptoms of Liver Cirrhosis In Hindi) खून की कमी या अनेमिया (anemia), कमज़ोरी और थकान, पीलिया, दिमाग़ में सूजन, हाथों में लालिमा. पित्त की विकृति  के कारण जिगर की कार्यशीलता में कमी आ जाती है. रस और रक्त धातु में जीववीश (toxins) उत्पन्न होते हैं. लगभग सभी प्रकार के दोष जैसे की पाचक शक्ति, चर्म की रंगत, भूख का ना लगना, ये सब लक्षण इस रोग में देखने को मिलते हैं. लीवर सिरोसिस की जाँच और टेस्ट तथा आयुर्वेदीय वर्णन (Diagnosis of Liver Cirrhosis In Hindi): AMT और ALT के परीक्षण (test). Alkaline Phospha...

हड्डियों (Osteoporosis) का आयुर्वेदिक उपचार

Osteoporosis  नामक रोग में हड्डियों की घनिष्टता में कमी आ जाती है जिससे वे मामूली कारण से ही टूटकर चटक जाती है. साधारण छींकने की क्रिया से भी हड्डियों में दरार हो जाना इस रोग का लक्षण हैं. यह रोग शरीर में वात के बिगड़ने से होता है. वात प्रकृति में ठंडा तथा रुक्ष होता है, इसलिए इसे नियंत्रित करने के लिए कफ के स्निग्ध गुण का उपयोग किया जाता है. व्यक्ति को दिन में 3 से 4 बार प्राकृतिक कॅल्षियम युक्त आहार का सेवन करना चाहिए. रोग के कारण (Causes of Osteoporosis In Hindi) महिलायों में यह समस्या पुरुषों के मुक़ाबले ज़्यादा पाई जाती है. बाल्यकाल और तरुण अवस्था में कॅल्षियम-युक्त पौष्टिक भोजन का यथोचित सेवन करने से  osteoporosis  की समस्या बुढ़ापे में होने की संभावना कम हो जाती है. परिवार में आनुवांशिक कारणों से भी यह रोग अधिक होने की संभावना बढ़ जाती है. यदि पहले से ही हड्डियों का ढाँचा कमज़ोर और छोटा है तो यह समस्या प्रबल रूप ले सकती है. मेनोपॉज़ के समय में महिलायों के हारमोन एस्टरोगेन  (estrogen ) में कमी आ जाने से भी कॅल...

अधिमन्थ अथवा मोतियाबिंदु (Glaucoma) का आयुर्वेदिक उपचार

मोतियाबिंदु या ग्लकोमा के रोग को साइलेंट थीफ  (Silent Thief) भी कहा जाता है. इस रोग का पता तब चलता है जब रोगी की दृष्टि में स्थाई विकार पैदा हो जाता है. अगर उसकी किस्मत अच्छी है तो चिकित्सक से नियमित जाँच करवाते हुए रोग का पता चल जाता है और उचित इलाज द्वारा इसके द्वारा होने वाले दृष्टि नाश से बचा जा सकता है. यह घातक रोग विश्व में अंधेपण का दूसरा प्रमुख कारण है. मोतियाबिन्दु के रोग में आँख के उन रोगों का समूह है जिनसे ऑप्टिक तंत्रिका पर दुष्प्रभाव पड़ता है जिस कारण दृष्टि में स्थाई रूप से हानि हो जाती है. आँख की पुतली की अंदुरूनी सतह पर दबाव का निर्माण हो जाता है जिससे ऑपटिक तंत्रिका (optic nerve) और रटिना (retina) दोनों पर दुष्प्रभाव पड़ता है.  दि इसका इलाज ना किया जाए तो व्यक्ति कुछ ही समय में पूर्णत्यः अँधा हो सकता है. इस रोग एवं इसके उपचार का वर्णन सुश्रुत संहिता में किया गया है. इसे अधिमंत के नाम से लिखा गया है. कफज़ अधिमनत के उपचार में नयाणमृत लौह तथा त्रिफालादी वर्ती का प्रयोग इस ग्रंथ में लिखित रूप से मिलता है. मॉडर्न मेडिकल साइन्स (Modern medical Science)...

ग्रहनी (IBS) का आयुर्वेद द्वारा उपचार

ग्रहनी (आई बी एस): इस रोग का कोई निश्चित कारण नही है. पाचाशय में  विभिन्न प्रकार की किण्वक(enzymes) का समूह मौजूद है जिससे खाए हुए भोजन का पाचन किया जाता है (अग्नि) इसी को जठराग्नि भी कहा जाता है. इस पाचाशय का कार्य एक तरफ से भोजन को ग्रहण करना है और दूसरी ओर से ना पचने वाले तत्वों का निष्कासन करना है. परंतु यदि यह तंत्र शक्ति विहीन पड़ जाए तो यह अनपचे भोजन को ही बाहर निकालने लग जाती है. इस कारण अनेक प्रकार की समस्याएँ एवम् रोग उतन्न हो जाते हैं. जिनमें से एक आई बी एस  है. इस व्याधि में आँतों की गति सामान्य से अधिक हो जाती है. इस कारण पेट में दर्द, कब्जियत, पेचिश, अथवा अंतडियों में तनाव उत्पन्न हो जाता है. विभिन्न प्रकार की ग्रहिणी एवं उनके लक्षण (Four Types Of IBS according to Ayurveda And Their Symptoms : Hindi) इस रोग में पाचक तंत्र में क्रम से बारी-बारी से रोगी को कभी कब्जियत और कभी पेचिश हो जाती है. इस रोग में रोगी को प्यास अधिक लगती है, मुँह में बेस्वाद्पन, आँखों से सामने अंधेरा आना, पैरों में सूजन, जिससे अंतडियों के उपरी अथवा निचले ...