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हड्डियों (Osteoporosis) का आयुर्वेदिक उपचार

Osteoporosis नामक रोग में हड्डियों की घनिष्टता में कमी आ जाती है जिससे वे मामूली कारण से ही टूटकर चटक जाती है. साधारण छींकने की क्रिया से भी हड्डियों में दरार हो जाना इस रोग का लक्षण हैं.
यह रोग शरीर में वात के बिगड़ने से होता है. वात प्रकृति में ठंडा तथा रुक्ष होता है, इसलिए इसे नियंत्रित करने के लिए कफ के स्निग्ध गुण का उपयोग किया जाता है. व्यक्ति को दिन में 3 से 4 बार प्राकृतिक कॅल्षियम युक्त आहार का सेवन करना चाहिए.

रोग के कारण (Causes of Osteoporosis In Hindi)

  • महिलायों में यह समस्या पुरुषों के मुक़ाबले ज़्यादा पाई जाती है.
  • बाल्यकाल और तरुण अवस्था में कॅल्षियम-युक्त पौष्टिक भोजन का यथोचित सेवन करने से osteoporosis की समस्या बुढ़ापे में होने की संभावना कम हो जाती है.
  • परिवार में आनुवांशिक कारणों से भी यह रोग अधिक होने की संभावना बढ़ जाती है.
  • यदि पहले से ही हड्डियों का ढाँचा कमज़ोर और छोटा है तो यह समस्या प्रबल रूप ले सकती है.
  • मेनोपॉज़ के समय में महिलायों के हारमोन एस्टरोगेन (estrogen) में कमी आ जाने से भी कॅल्षियम (calcium) का रिसाव हड्डियों में से होकर उन्हें शिथिल बना देता है.
  • इसके अलावा थायरॉइड (thyroid) हारमोन की अधिकता से भी अस्टईयाप्रोसिस (osteoporosis) की शिकायत बढ़ जाती है. पैराथायरॉइड (Parathyroid) और अन्य अंतः स्त्राविय ग्रंथियों के असंतुलन से भी यह समस्या उत्पन्न होती है. इसलिए अंतःस्त्रावी तंत्र का स्वास्थ भी अति अनिवार्य है.
  • इसके अलावा खुराक और जीवन शैली में कमी के कारण भी यह रोग उत्पन्न होता है. जिन लोगों के भोजन में कॅल्षियम की मात्रा शरीर की आवश्यकता से कम हो, उससे भी अस्टईयाप्रोसिस की बीमारी का प्रकोप बढ़ता है. जिन लोगों में ख़ान-पान संबंधी रोग जैसे की anorexia या bulimia पाए जाते है, उन व्यक्तियों में इस रोग के होने की प्रबल संभावना रहती है.
  • इसके अलावा जिन लोगों में जठरांत्रिय-संबंधित (gastrointestinal operation) ऑपरेशन हुआ हो, उनमें इस रोग के होने की संभावना अधिक होती है. इसका कारण है कि उनमें कॅल्षियम को जस्प करने की क्षमता कम हो जाती है.
  • स्टेराइड्स (steroids) और कुछ विभिन्न प्रकार के रोगों के निदान के लिए उपयुक्त दवाइयों (कॅन्सर, अपस्मार) के प्रयोग से भी यह समस्या व्यक्ति के शरीर में उत्पन्न होती है. अन्य कारण जैसे ज़्यादा समय बैठ कर काम करने से, शराब के अधिक सेवन, और तंबाकू के प्रयोग से यह रोग शरीर में प्रकट हो जाता है.

औस्तियोपोरोसिस में भोजन (Diet in Osteoporosis In Hindi)

वात को शांत करने वाले भोजन का सेवन रोगी के लिए पथ्यकर है.
  • तिल का सेवन रोग के उपचार में बहुत महत्व रखता है. यह एक संपूर्ण पुष्टिदायक पदार्थ है जिससे शरीर को कॅल्षियम की भरपूर मात्रा सहज से मिल जाती है. गर्मियों में एक चम्मच तिल रात्रि को भिगोकर रख दें . प्रातः काल पानी निकाल कर तिल को अच्छी तरह चबाकर खा लें. सर्दियों में तिल का सेवन बिना पानी में भिगोये ही करें. यदि इसके साथ दूध का सेवन भी किया जाए तो यह बहुत लाभ देता है.
  • नाश्तें में ऋतु अनुसार ताज़ें फलों का सेवन करना चाहिए.
  • दोपहर के भोजन में छिलके वाले चावल, मुंग की डाल, भिंडी, अदरक और जीरे वाली लस्सी का सेवन करना हितकर है.
  • चौलाई और पालक तथा अन्य सब्जियों से बना सूप इस रोग के निदान में बहुत उपयोगी है. इस सूप में ब्लॅक बीन्स(blackbeans) डालने से इसकी पौष्टिकता और गुणवत्ता बढ़ जाती है.
  • रात्रि के समय केसर- और बादाम युक्त दूध का सेवन करना अत्यंत लाभकारी है. सर्दियों में इस प्रयोग में दूध में खजूर भी मिलाया जा सकता है.
  • आयुर्वेद के अनुसार एलाईची, दालचीनी, अदरक, काली मिर्च, हल्दी और लौंग मिश्रित देसी गाय के दूध का सेवन करना चाहिए जो शरीर के लिए लाभदायक है. इस रोग में वात रोग को शांत करना अत्यंत आवश्यक है.

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