सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

पेशाब के रंग से अपने स्‍वास्‍थ के बारे में जानकारी

अपने पेशाब के रंग से आप अपने शरीर के संकेतों को जान सकते हैं क्या आपका शरीर कैसे स्वास्थ्य लेवल पर है तो चलिए पढ़ते हैं कुछ अपने शरीर के संकेतों के बारे में अपने पेशाब के रंग से आप पता लगा पाएंगे क्या आपका शरीर कितना स्वस्थ है या आप बीमार हैं.

पेशाब के रंग से जानें अपने शरीर के स्वास्थ्य का लेवल

दोस्तों जहां इस पोस्ट में हम आपको आज बताएंगे पेशाब के रंग से आप किस तरह अपने शरीर का स्वास्थ्य स्तर पता कर सकते हैं पेशाब के रंग के जरिए आपके शरीर का स्वास्थ्य लेवल इसलिए पता पड़ जाता है क्योंकि सारी बीमारियां पेट से होती है. और आपने भी देखा होगा जब आप आश्वस्त होते हैं तो आप के पेशाब का रंग बदल जाता है नीचे संकेतों को आप पढ़ सकते हैं और यह तय कर सकते हैं कि आपको अब क्या करना है. 
वैसे तो मानव शरीर में प्रत्येक अंग महत्वपूर्ण है लेकिन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हमारे लिए गुर्दे का महत्व है क्योंकि गुर्दा हमारे शरीर से गंदगी को साफ करने में अहम भूमिका निभाता है, और अगर जरा सी भी गड़बड़ होती है तो हमें पेशाब के रंग के जरिए पता चल जाता है क्योंकि पेशाब का रंग बदलना आपके शरीर के अंदर रोग के जन्म लेने के संकेत होते हैं.
पेशाब का रंग हल्का पीला होना :- अगर आपके मूत्र का रंग हलका पीलेपन पर है या फिर बिल्कुल पानी की तरह साफ है इसका मतलब है आपके शरीर का प्रत्येक अंग भली भांति कार्य कर रहा है और आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है.
पेशाब का रंग पीला होना :- अगर आपकी यूरिन का रंग पीले रंग का है इसका मतलब है कि आपको पानी की कमी हो चुकी है. अगर आप पानी कम पीते हैं तो पहले से अधिक मात्रा में पानी पीना चालू कर दें ये अपने आप अपने सामान्य रंग में बदल जाता है.
पेशाब का रंग गाढ़ा पीला होना:- और यदि आपके यूरिन का रंग एकदम से गाढ़ा और पीले पन पर है तो यह अच्छे संकेत नहीं हैं इसका मतलब है आप का लिवर सही तरीके से काम नहीं कर रहा और आपको लीवर की या फिर हेपेटाइटिस की प्रॉब्लम हो सकती है. 
पेशाब का दूधिया सफेद रंग :- अगर आप का पेशाब दूधिया सफेद रंग का है तो इसका मतलब है कि आप के पेशाब में बैक्टीरिया बन चुके हैं, क्योंकि ऐसा तब होता है जब आपके मूत्र मार्ग के रास्ते में संक्रमण पैदा हो जाए या फिर आप कि गुर्दे (किडनी) में पथरी बनने लगती है. इस तरह के संकेत आने पर आप डॉक्टर से एक बार जरूर जांच करवाएं.
पेशाब का रंग लाल हल्का गुलाबी :- आपके यूरिन का रंग हल्का या लाल गुलाबी इसलिए भी हो सकता है क्या आपने चुकंदर या स्ट्रॉबेरी खाया हो अगर यह सब खाया है तो इस पोस्ट पर ध्यान ना देना और लेकिन आप अगर सामान्य तौर पर इस तरह का पेशाब आपको आता है तो आपके पेशाब में लाल रंग का खून भी हो सकता है तो यह बेहद चिंताजनक विषय इस को डॉक्टर को तुरंत दिखाएं क्योंकि इन ऐसा अधिकतर तब देखा जाता है या तो कुछ लोग जब अपने शरीर की क्षमता से अधिक व्यायाम करते हैं उनके शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं टूट जाती हैं और उनके पेशाब से अब यह गुलाबी रंग का या लाल रंग का यूरिन आना शुरू हो जाता है या यह किसी अन्य बीमारी का संकेत भी हो सकता है.  इसलिए अगर आपने उस दिन चुकंदर या स्ट्रॉबेरी नहीं खाया है तो फिर आप डॉक्टर को अवश्य दिखाएं. 
नारंगी रंग का यूरिन आना :- दोस्तों कई बार ऐसा होता है आप जब कोई दवा खाते हैं तो यह नारंगी रंग पैदा कर सकती है विशेषकर यूरिन से जुड़ी समस्याओं को सही करने के लिए कुछ ऐसी दवाएं होती है जब के पेशाब का रंग नारंगी रंग में बदल देती हैं और इसके अलावा कुछ लोगों को गाजर खाने से भी यह गाजर का रस पीने से उनके पेशाब का रंग हल्का नारंगी हो जाता है.
नीला या हरा यूरिन आना :- कई बार जैसा कि आपने ऊपर पड़ा पेशाब संबंधी समस्याओं को कम करने के लिए जो दवाइयां बनाई जाती हैं उन में विशेष डाई का इस्तेमाल होता है जिसकी वजह से भी आपके पेशाब का रंग हल्का नीला या हरे रंग में बदल जाता है. अगर आपने इस तरह की कोई दवाई पी है या खायी हो तो चिंता करने की बात नहीं है क्योंकि ऐसा होना स्वाभाविक ही है. या फिर आपने कुछ ऐसा खाना खाया हो जिसमें आर्टिफिशियल रंग का इस्तेमाल किया गया हो तब भी आपकी पेशाब का रंग नीला या हरा हो सकता है और अगर इन दोनों में से कोई कारन नहीं है और आपको इस रंग की यूरिन आ रही है तो आप चिकित्सक से अवश्य परामर्श करें. 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

**स्वस्थ्य वृद्धावस्था**

बुढ़ापे की अवस्था हर मनुष्य के जीवन का ऐसा अंग है जब अंग-प्रत्यंग ढीले पड़ जाते हैं. चेहरे से रौनक और शरीर से स्फूर्ति भी चली जाती है. ज्यादातर मनुष्यों में इस अवस्था में अनेक प्रकार के रोग उत्पन्न हो जाते हैं. ऐसे में उनका मन भी उत्साह हीन हो जाता है. परंतु क्या वास्तव में जीवन का अन्तिम छोर इस प्रकार का होना चाहिए? क्या हम बुढ़ापे की रूपरेखा को बदल नही सकते? शरीर में धीरे-धीरे कमजोरी आने लगती है और चयापचय के कार्य मंद पड़ जाते हैं. चेहरे पर झुर्रियन और रंगत में असंतुलन से धब्बे और झाइयाँ पड़ जातीं हैं. माथे, गालों और गले पर झाइयाँ आना एक आम बात है. बुढ़ापे को लाने में दो कारक विशेष रुप से कार्यरत होते हैं जिनमें से एक बाह्य है और अन्य आंतरिक है. यदि सूर्य के प्रकाश कि तीव्रता वास के क्षेत्र में अधिक है और सूर्य कि किरणों नित्य ही शरीर को दीर्घ समय तक स्पर्श करती हैं तो यह बुढ़ापे को अति तीव्र कर देती है. रेगिस्तान में सूखे क्षेत्र में रहना, गर्म हवाएँ, चिंता, तनाव, धूम्रपान, अनुचित और आवश्यकता से कम भोजन सेवन करना, खारा पानी, व्यायाम ना करना या फिर अधिक ठ...

शोथ अथवा एडीमा का आयुर्वेदिक उपचार

शोथ अथवा एडीमा को आयुर्वेद में शॉफ़ भी कहा जाता है. शोथ शरीर के विभिन्न हिस्सों उत्पन्न हो सकता है जैसे कि चेहरे, आँखों या पिंडलियों में. परंतु कई रोगीयों में यह पूरे शरीर पर पाया जाता है. हालाँकि  अधिकतर स्थितियों में यह सिर्फ़ एक लक्षण मात्र की तरह माना जाता है जहा शरीर के मुख्य अंगों जैसे कि गुर्दे, जिगर, हृदय, फेफड़े, मस्तिष्क, गर्भाशय आदि में गंभीर विकार उत्पन्न हो रहे हों परंतु फिर भी ये समस्या अपने आप में एक रोग मानी जाती है. अतः प्रधान दोष के अनुसार इसका विमोचन किया जाता है. आयुर्वेद के अनुसार इस रोग का कारण और उनके निदान प्रदान किए गये हैं. शोथ के कारण (Causes Of Swelling In Hindi) यह रोग कई कारणों से उत्पन्न हो सकता है. पंचकर्म: यदि अनुचित अथवा असंतुलित प्रकार से दोषों का विमोचन किया गया हो. किसी प्रकार का ज्वर या बुखार अत्यधिक उपवास रखें से ऋतु अनुसार पथ्य का सेवन ना किया जाए अत्यधिक अम्लीय अथवा अत्यधिक क्षारीय भोजन लेने से यदि अत्यधिक मिर्च-मसालेदार भोजन का सेवन किया जाए. पुरानी लस्सी अथवा दही का सेवन करने से विरुद्धाहार के सेवन से विषाक्...

मुहाँसे त्वचा की सूजन होते हैं,

मुहाँसे सूज जाती हैं और पीप से भर जाती हैं। तैलीय ग्रन्थियों द्वारा सीबम  का अत्यधिक उत्सर्जन मुहाँसों का प्राथमिक कारण है। यहाँ मुहाँसों के उपचार हेतु कुछ सामान्य विधियाँ दी गई हैं: मुहाँसों के उपचार के लिए अधिकतर नीम और तुलसी जैसी पत्तियों का उपयोग किया जाता है।   मुहाँसों को कम करने के लिए उन पर ताज़ी और सूखी पत्तियों का लेप 10 मिनट के लिए लगाएँ, इसे एक सप्ताह में 4-5 बार करें। इनमें निम्बिन नामक सक्रिय तत्व होता है जो संक्रमणरोधी, फफूंदरोधी, ज्वरनाशक होता है और मुहाँसों को नियंत्रित करता है। तुलसी में यूजेनोल होता है, जो कि संक्रमणरोधी और निश्चेतक(antiseptic) होता है,   और यह मुहाँसों के प्रभाव को नियंत्रित करता है। मुहाँसों से छुटकारे के लिए तुलसी के लेप को एक सप्ताह में 4-5 बार लगाएँ। आलू का रस त्वचा पर मंद ब्लीचिंग चमक देता है। मुहाँसों पर 10 मिनट के लिए आलू का रस/कटा आलू/मसला आलू सीधे लगाएँ और फिर धो डालें। आलू में विटामिन-सी, विटामिन-बी6, केरोटिनोइड्स और एंथोसायनिन्स होते हैं जो त्वचा को प्राकृतिक चमक देते हैं।  शहद में मिला हुआ नीबू का रस मुहाँसों को ठीक कर...