बुढ़ापे की अवस्था हर मनुष्य के जीवन का ऐसा अंग है जब अंग-प्रत्यंग ढीले पड़ जाते हैं. चेहरे से रौनक और शरीर से स्फूर्ति भी चली जाती है. ज्यादातर मनुष्यों में इस अवस्था में अनेक प्रकार के रोग उत्पन्न हो जाते हैं. ऐसे में उनका मन भी उत्साह हीन हो जाता है. परंतु क्या वास्तव में जीवन का अन्तिम छोर इस प्रकार का होना चाहिए? क्या हम बुढ़ापे की रूपरेखा को बदल नही सकते? शरीर में धीरे-धीरे कमजोरी आने लगती है और चयापचय के कार्य मंद पड़ जाते हैं. चेहरे पर झुर्रियन और रंगत में असंतुलन से धब्बे और झाइयाँ पड़ जातीं हैं. माथे, गालों और गले पर झाइयाँ आना एक आम बात है. बुढ़ापे को लाने में दो कारक विशेष रुप से कार्यरत होते हैं जिनमें से एक बाह्य है और अन्य आंतरिक है. यदि सूर्य के प्रकाश कि तीव्रता वास के क्षेत्र में अधिक है और सूर्य कि किरणों नित्य ही शरीर को दीर्घ समय तक स्पर्श करती हैं तो यह बुढ़ापे को अति तीव्र कर देती है. रेगिस्तान में सूखे क्षेत्र में रहना, गर्म हवाएँ, चिंता, तनाव, धूम्रपान, अनुचित और आवश्यकता से कम भोजन सेवन करना, खारा पानी, व्यायाम ना करना या फिर अधिक ठ...
अच्छी सेहत के लिए 1दाल, चावल/रोटी, सब्ज़ी, फल और सलाद शामिल करें प्रोटीन के लिए: दाल, अंडा, दूध, पनीर हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ ज़रूर खाएँ 💧 2. पानी ज़्यादा पिएँ रोज़ 2–3 लीटर पानी सुबह खाली पेट 1 गिलास गुनगुना पानी अच्छा रहता है 🍎 3. जंक फूड कम करें तला-भुना, ज़्यादा मीठा, कोल्ड ड्रिंक कम लें बाहर का खाना कम से कम खाएँ ⏰ 4. समय पर खाना खाएँ नाश्ता कभी न छोड़ें रात का खाना हल्का और सोने से 2–3 घंटे पहले खाएँ 🍽 5. Portion Control रखें एक बार में बहुत ज़्यादा न खाएँ धीरे-धीरे और चब
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