शोथ अथवा एडीमा को आयुर्वेद में शॉफ़ भी कहा जाता है. शोथ शरीर के विभिन्न हिस्सों उत्पन्न हो सकता है जैसे कि चेहरे, आँखों या पिंडलियों में. परंतु कई रोगीयों में यह पूरे शरीर पर पाया जाता है. हालाँकि अधिकतर स्थितियों में यह सिर्फ़ एक लक्षण मात्र की तरह माना जाता है जहा शरीर के मुख्य अंगों जैसे कि गुर्दे, जिगर, हृदय, फेफड़े, मस्तिष्क, गर्भाशय आदि में गंभीर विकार उत्पन्न हो रहे हों परंतु फिर भी ये समस्या अपने आप में एक रोग मानी जाती है. अतः प्रधान दोष के अनुसार इसका विमोचन किया जाता है. आयुर्वेद के अनुसार इस रोग का कारण और उनके निदान प्रदान किए गये हैं.
शोथ के कारण (Causes Of Swelling In Hindi)
यह रोग कई कारणों से उत्पन्न हो सकता है.
- पंचकर्म: यदि अनुचित अथवा असंतुलित प्रकार से दोषों का विमोचन किया गया हो.
- किसी प्रकार का ज्वर या बुखार
- अत्यधिक उपवास रखें से
- ऋतु अनुसार पथ्य का सेवन ना किया जाए
- अत्यधिक अम्लीय अथवा अत्यधिक क्षारीय भोजन लेने से
- यदि अत्यधिक मिर्च-मसालेदार भोजन का सेवन किया जाए.
- पुरानी लस्सी अथवा दही का सेवन करने से
- विरुद्धाहार के सेवन से
- विषाक्त भोजन के सेवन से
- लगातार बैठे रहकर काम करने से
शॉफ़ का प्रारंभिक काल एवं कारण (Initial Stage Of Swelling And Its Symptoms And Causes In Hindi)
शरीर में किसी प्रमुख रोग के कारण कफ, रक्त, वात, पित्त में अवरोध आ जाता है. इस वजह से यह शरीर के कई हिस्सों में अवरोधित हो जाते हैं. इस कारण से शरीर की माँस और त्वचा पर भी असर पड़ता है. जो बाद में सख़्त होकर फूल जाती हैं.
शोथ के लक्षण:
- शरीर में भारीपन
- झुंझलाहट
- शरीर के किसी भी अंग में सूजन
- गर्माहट
- नसों-नाड़ी में कमज़ोरी
- रोएँ खड़े हो जाना
वातज शोथ के लक्षण:
- प्रभावित क्षेत्र पर त्वचा का पतलापन
- खुरदुरापन
- लाल या गहरे रंगत का आना
- रोवँ का खड़ा हो जाना
- हल्का दर्द
- दिन के समय में बढ़ा हुआ शोथ
- गड्डे बनाने वाली सूजन
- अस्थाई सूजन
- प्रभावित क्षेत्र में सुन्न्ता
पित्तज़ शोथ के लक्षण:
- सूजन वाले क्षेत्र में कोमलता और इस पर घाव आने की संभावना भी रहती है.
- जख्म में से बदबूदार मवाद का आना
- आँखों में जलन और सूजन
- अत्यधिक जलन
- स्थाई रूप से रहने वाला मोटा शोथ
- अनेमिया और पीलपन
- बेस्वाद पाना
- वमन
- जी मिचलाना
- अपच
- बिना गड्डे बनाने वाली सूजन
- रात्रि में शोथ के प्रकोप का बढ़ना
- सोंठ का कावा बनकर लेना शोथ में लाभ देता है
- अरिंड की जड़
- गोक्षुर
- क्षण भर में छालों का उभर आना
- पुनर्नवादी मंदूर
- जीरा
- हरिद्रा
- शिलाजीत
- देवदारू
- हरतकी या हरड़
- शल्लकी
- शुन्तयादि काशया
- पुनर्न्वासव
- गोमूत्र मंदूर
- कंसा हरीतकी
- दशमूल हरीतकी
- वासाकसावा
- गोक्षुरादि गुग्गुलु
- शोथरी रस
- शुद्ध हरिद्रा का आधा चम्मच यदि एक चम्मच अदरक मिलाकर पानी के साथ नित्य सेवन करने से शोथ में कमी आती है
- एक चम्मच पुनर्नव, और बराबर मात्रा में हल्दी और अदरक दो कप पानी में तब तक उबालें जब तक ये कढ़ कर आधा ही रह जाए. इस मिश्रण को छान कर इसमे स्वाद अनुसार गुड़ मिलाकर रोज़ सुबह सेवन करना चाहिए.
- 1 ग्राम अरिंडमूल, गोक्षुरा और ज़ीरा बराबर मात्रा में लेकर इन्हें 2 कप पानी में तब तक उबाल लें जब तक ये मिश्रण आधा ना रह जाए. अब इसे छानकर सेवन कीजिए. प्रतिदिन ऐसा करने से शोथ में अवश्य आराम मिलता है.
- पुराने चावल,
- जौ
- मूँग
- कुल्थि
- ताम्र चूड़ा रस
- पुराना घृत
- लस्सी (तक्र)
- मधु
- शिगृु
- रसोना (लहसुन)
- छोटी गाजर
- अमलकी
शोथ में अपथ्यकार - लवन (नमक)
- सूखी सब्जियाँ
- नवन्ना
- शराब
- खट्टे पदार्थ
- दालें
- भारी गरिष्ट भोजन
- मिर्च-मसालेदार भोजन
- दही
अभिगत शोथ (चोट के कारण उत्पन्न हुआ शोथ)
तीखे और धार वाले यंत्रों के आघात से, अत्यधिक ठंडी हवा, पाला लग जाने से, भी शरीर में शोथ उत्पन्न हो जाता है. भल्लातक की नज़दीकी से, कप्पिकच्चू घास के निकट जाने से भी शरीर में शोथ उत्पन्न हो सकता है. ये सब पित्तज़ शोथ के लक्षण लिए हुए होते हैं.
कई बार विष के कारण भी शरीर में शोथ की उत्पत्ति हो जाती है. विषैले जीव जैसे की कोई कीड़ा, पक्षी, जानवर, सर्प अथवा उनकी विषैली उड़ाव के कारण भी शरीर में शोथ उत्पन्न हो सकता है. विष की तीव्रता के अनुसार ये काफ़ी घातक स्थिति भी हो सकती है. इस प्रकार के विष को फैलने में देर नही लगती. इसलिए इस विष के प्रवेश स्थान के आसपास कड़ी गाँठ बाँधकर, विषाक्त रक्त और दंश को सर्वप्रथम निकालना चाहिए. इस कारण से उत्पन्न शोथ में व्यक्ति को श्वास लेने में कठिनाई होती है, वमन, बेहोशी तथा अन्य घातक लक्षण भी होते है. इस लेख में केवल सामान्य रूप से उत्पन्न हुई शोथ और उसके उपचार पर ही विचार किया जाएगा.
कई बार विष के कारण भी शरीर में शोथ की उत्पत्ति हो जाती है. विषैले जीव जैसे की कोई कीड़ा, पक्षी, जानवर, सर्प अथवा उनकी विषैली उड़ाव के कारण भी शरीर में शोथ उत्पन्न हो सकता है. विष की तीव्रता के अनुसार ये काफ़ी घातक स्थिति भी हो सकती है. इस प्रकार के विष को फैलने में देर नही लगती. इसलिए इस विष के प्रवेश स्थान के आसपास कड़ी गाँठ बाँधकर, विषाक्त रक्त और दंश को सर्वप्रथम निकालना चाहिए. इस कारण से उत्पन्न शोथ में व्यक्ति को श्वास लेने में कठिनाई होती है, वमन, बेहोशी तथा अन्य घातक लक्षण भी होते है. इस लेख में केवल सामान्य रूप से उत्पन्न हुई शोथ और उसके उपचार पर ही विचार किया जाएगा.
दोष की प्रधानता के अनुसार ही उपचार का प्रावधान किया जाता है. यदि रोगी को अपच है तो सर्वप्रथम इसका निवारण करना चाहिए. गंभीर अजीर्ण होने पर रोगी को उपवास (लंघन) करना चाहिए और तत्पश्चात उसे पाचक दिया जाता है. बाह्य लेपन, गर्म अथवा भाप स्नान और सेवन करने योग्य औषधियों द्वारा इसका इलाज किया जाता है.
सूजन में लाभप्रद कुछ औषधियाँ (Herbs And Spices Helpful In Edema In Hindi)
सूजन होने पर घर में ही उपलब्ध अनेक आम मसालों द्वारा या किन्ही आसानी से मिलने वाली आयुर्वेदीय औषधियाँ जो सेवन के लिए अत्यंत सरल और सुरक्षित है, इन्हें उपयोग किया जाता है:
घरेलू प्रयोग द्वारा व्याधि का निवारण ( Home Remedies For Relief In Edema In Hindi)
पथ्यापथ्य (Diet Recommended In Edema In Hindi)
शोथ में पथ्य्कर : यदि इस रोग में ख़ान-पान का ध्यान ना रखा जाए तो यह कष्टकारी और ज़िद्दी रूप ले लेती है. इसलिए पथ्य आहार का ही सेवन करना शोथ में हितकर है. निम्न लिखित आहार-विहार सूजन कम करने के लिए लाभप्रद हैं:
इसके अलावा थकाने वाले कार्य करना, लंबी सैर करना अथवा जिम या व्यायाम शोथ के रोगी को नही करना चाहिए एक क्षेत्रीय या शरीर के किसी एक भाग में उत्पन्न शोथ सामान्य रोग है जिसका निवारण आसानी से हो जाता है. परंतु पूरे शरीर में यदि शोथ हो तो यह किसी गंभीर समस्या को इंगित कर सकता है. इस कारण इस स्थिति में तुरंत उचित चिकित्सकीय सलाह लेना और रोग निदान करना अत्यंत ही महत्वपूर्ण है. ऐसा ना करना प्राणघातक भी सिद्ध हो सकता है. इस कारण तुरंत चिकित्सकीय निरीक्षण द्वारा इलाज प्रारंभ करें.
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