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डायबिटिक न्यूरोपैथी का का आयुर्वेदिक उपचार

मधुमेह के रोग के कारण उत्पन्न होने वाली नसों की विकृति को डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है. मधुमेह के रोग के कारण उत्पन्न होने वाली नसों की विकृति को डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है. इस रोग में शरीर के बाहीय अंगों में सुन्न्ता और नसों की कार्यकारी शक्ति का ह्रास होता रहता है. मुख्य रूप से इसमें पाँवों में विकृत संवेदना उत्पन्न होती है. आम तौर पर पाँव मैं झंझनाहट और सुन्न्ता का आभास होता है. काई बार यह पीड़ा अत्यंत तीक्ष्ण और कष्टदायक होती है. जैसे-जैसे समय बीतता है, पाँवों की संवेदनशीलता समाप्त हो जाती है. इस अवस्था में अगर रोगी के पाँव में कोई घाव उत्पन्न हो जाए तो वह जल्दी ठीक नही होता अथवा बढ़कर नासूर का रूप ले लेता है. स्थिति इतनी विकट हो जाती है जिससे पाँव को काटना पड़ सकता है. शुरू-शुरू में पाँव और टाँगों में कमज़ोरी और चलने में दिक्कत अनुभव होती है. इसके अलावा मधुमेह के कारण तीन अलग प्रकार की नस-विकृति उत्पन्न होती है. थर्ड नर्व पॉल्ज़ी, डायबिटिक अमयोट्रोफ़ी और ऑटनामिक न्यूरोपैथी.


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