नासगत रक्त पित्त के कारण बहुत बार नासिका से खून की नकसीर फूट जाती है. यह तकलीफ़ गर्मीयों में अधिक होती है और ख़ासकर बच्चों में यह ज़्यादा पाई जाती है. असल में वातावरण में अत्यंत शुष्कता और गर्मी के कारण, नासिका में संरक्षक श्लेष्मा धार सूख जाती है. अत्याधिक गर्मी से शरीर में पित्त भी बढ़ जाता है जिसका प्रभाव नासिका की नसों पर पड़ता है और उनसे खून का रिसाव होने लगता है.
गर्मियों में आंतरिक संरक्षक झिल्ली एलर्जी के प्रति भी अधिक संवेदनशील होती है.
यह अतिसंवेदनशीलता भी नाक से खून आने का कारक बन जाती है. जब नाक की आंतरिक सतह की झिल्ली उत्तेजित होकर झड़ जाती है तब नकसीर फूटने की हालत पैदा हो जाती है.
गर्मियों में आंतरिक संरक्षक झिल्ली एलर्जी के प्रति भी अधिक संवेदनशील होती है.
यह अतिसंवेदनशीलता भी नाक से खून आने का कारक बन जाती है. जब नाक की आंतरिक सतह की झिल्ली उत्तेजित होकर झड़ जाती है तब नकसीर फूटने की हालत पैदा हो जाती है.
नाक से खून बहने के साधारण कारण (Common Reasons For Nose-bleed In Hindi)
- नासिका के अंदर किसी तरह के घाव का उत्पन्न होना
- किसी अन्य घातक रोग का लक्षण
- यदि बहुत अधिक देर तक गर्मी और खुश्की के वातावरण में व्यक्ति रहे तो इससे भी नकसीर फूटने की संभावना बढ़ जाती है.
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें